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नाराजगी चाहे कितनी भी क्यो न हो तुमसे, तुम्हें छोड़ देने का ख्याल हम आज भी नही रखते.
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तेरी कमर पर हाथ रक्खा था .. नियत का फिसल कर नीचे सरकना तो लाज़मी था
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